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नवरचना युनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट प्रोफेसर प्रत्यूष शंकर की “हिस्ट्री ऑफ अर्बन फोर्म ऑफ इंडिया” पुस्तक का विमोचन
· यह पुस्तक भारतीय शहरों के वास्तुशिल्प विकास की हमारी समझ में एक महत्वपूर्ण अंतर को दूर करती है
वडोदरा : नवरचना युनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट प्रोफेसर प्रत्यूष शंकर की नवीनतम पुस्तक “हिस्ट्री ऑफ अर्बन फिल्म ऑफ इंडिया” (भारत के शहरी स्वरूप का इतिहास: शुरुआत से लेकर 1900 तक) को नवरचना युनिवर्सिटी में अनावरण किया गया। यह पुस्तक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित की गई है।
इस पुस्तक का विमोचन RIBA स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ता जानेमाने वास्तुकार गुरजीत सिंह मथारू, नवरचना युनिवर्सिटी की अध्यक्षा तेजल अमीन एवं प्रोफेसर और कलाकार मयूर गुप्ता द्वारा किया गया।
इस अवसर पर नवरचना युनिवर्सिटी की अध्यक्षा श्रीमती तेजल अमीन ने कहा कि, “प्रोफेसर प्रत्यूष शंकर की यह पुस्तक हमारे शहरों को आकार देने में अन्वेषण और समझ की शक्ति को समर्पित है। यह पुस्तक उस अतीत की सराहना करने का एक प्रयास है जो हमारे वर्तमान और भविष्य को आकार देता है और हमारे अर्बन लैंडएस्केप के सार का पता लगाने और उसकी पुनर्कल्पना करने की प्रेरणा है।”
प्रोफेसर शंकर ने कहा कि, “‘भारत के शहरी स्वरूप का इतिहास’ हमारे शहरों के विकास की जटिलताओं को सुलझाने का प्रयास करता है। यह हमारी उंगलियों पर उपलब्ध विशाल मात्रा में डेटा और सच्ची समझ के बीच अंतर को दूर करने का प्रयास करता है। मेरा मानना है कि यह शहरी अध्ययन, वास्तुकला और आयोजन में आगे के प्रवचन और अन्वेषण के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा।
इस पुस्तक में प्रोफेसर शंकर ने भारतीय शहरों के वास्तुशिल्प विकास की हमारी समझ में एक महत्वपूर्ण अंतर को संबोधित किया हैं। वास्तुकला, योजना, शहरी डिजाइन और भूगोल जैसे विभिन्न शैक्षणिक विषयों में “शहरी” की अवधारणा पर व्यापक रूप से चर्चा की गई है, जबकि भारतीय शहरों के ऐतिहासिक रूपों की व्यवस्थित समझ का उल्लेखनीय अभाव बना हुआ है। सैटेलाइट इमेजरी, कुल स्टेशन सर्वेक्षण और अन्य उन्नत मैपिंग तकनीकों में मौजूदा समय की प्रगति के बावजूद, एक मजबूत वैचारिक मॉडल जो शहरी रूप में पैटर्न को समझने में मदद कर सकता है, इस संबंध में भ्रांति बनी हुई है।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में वास्तुकला, कला और शिक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ एक गहन पैनल चर्चा भी हुई। मथारू एसोसिएट्स के संस्थापक गुरजीत सिंह मथारू, प्रोफेसर और कलाकार मयूर गुप्ता तथा लेखक प्रोफेसर प्रत्यूष शंकर ने शहरी स्वरूप और ऐतिहासिक शहर परिदृश्य पर अपने विचार एवं दृष्टिकोण साझा किए।
कार्यक्रम में एक और मुख्य आकर्षण नवरचना युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट डिजाइन एंड आर्किटेक्चर (SEDA) द्वारा एक सेमेस्टर-एंड छात्रों का प्रोजेक्ट प्रदर्शन “रिसेंट ट्रेजेक्टरी” प्रदर्शनी थी। यह प्रदर्शनी स्टूडियो, कार्यशालाओं, निर्माण, इतिहास, मानविकी और अनुसंधान जैसे वास्तुकला और डिजाइन के विभिन्न विषयों के कार्यों को प्रदर्शित करती है और वास्तुकला और डिजाइन को पढ़ाने का अभ्यास उपलब्ध कराती है। यह शिक्षाविदों की व्यावसायिक यात्राओं और SEDA में उनके शिक्षण के अंतर्संबंध की एक झलक भी प्रदान करती है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया शिल्पा ठाकरे से @shilpat@nuv.ac.in पर संपर्क करें।


